श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 23: मार्कण्डेयजीके द्वारा विविध प्रश्न और नारदजीके द्वारा उनका उत्तर  »  श्लोक d37
 
 
श्लोक  13.23.d37 
साध्वी कुलं वर्धयति साध्वी पुष्टिर्गृहे परा।
साध्वी लक्ष्मी रति: साक्षात् प्रतिष्ठा संततिस्तथा॥
 
 
अनुवाद
एक गुणी स्त्री परिवार की उन्नति करती है। एक गुणी स्त्री घर की परम पोषक होती है और धन, प्रेम, प्रतिष्ठा की साक्षात देवी तथा वंश परंपरा की आधारशिला होती है।
 
A virtuous woman enhances the family. A virtuous woman is the ultimate nourishment in the house and is the goddess of wealth, love, prestige personified and the foundation of the progeny tradition.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)