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mahabharat 13.23.d36: जो पुरुष अपनी ही जाति की कन्या से विवाह करके उसे पत्नी बनाता है, उसकी पतिव्रता स्त्री एक पुत्र को जन्म देती है जो तर्पण करता है।   |   mahabharat अध्याय 13.23: मार्कण्डेयजीके द्वारा विविध प्रश्न और नारदजीके द्वारा उनका उत्तर   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 23: मार्कण्डेयजीके द्वारा विविध प्रश्न और नारदजीके द्वारा उनका उत्तर  »  श्लोक d36
 
 
श्लोक  13.23.d36 
आनयित्वा स्वकाद् वर्णात् कन्यकां यो भजेन्नर:।
दातारं हव्यकव्यानां पुत्रकं या प्रसूयते॥
 
 
अनुवाद
जो पुरुष अपनी ही जाति की कन्या से विवाह करके उसे पत्नी बनाता है, उसकी पतिव्रता स्त्री एक पुत्र को जन्म देती है जो तर्पण करता है।
 
A man who marries a girl of his own caste and establishes her as his wife, his chaste wife gives birth to a son who offers oblations.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)