श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 23: मार्कण्डेयजीके द्वारा विविध प्रश्न और नारदजीके द्वारा उनका उत्तर  »  श्लोक d33
 
 
श्लोक  13.23.d33 
नारद उवाच
नित्यं निवसते लक्ष्मी: कन्यकासु प्रतिष्ठिता।
शोभना शुभयोग्या च पूज्या मङ्गलकर्मसु॥
 
 
अनुवाद
नारदजी बोले- लक्ष्मी सदैव कन्याओं में निवास करती हैं। वे उनमें सदैव पूजनीय हैं; इसीलिए प्रत्येक कन्या सुन्दर, शुभ कर्मों की पात्र तथा शुभ कर्मों में पूजनीय है।
 
Naradji said- Lakshmi always resides in girls. She is always revered among them; That is why every girl is beautiful, worthy of auspicious deeds and worshipable in auspicious deeds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)