मार्कण्डेय उवाच
श्रुतं वर्णावरैर्दत्तं हव्यं कव्यं च नारद।
सम्प्रयोगे च पुत्राणां कन्यानां च ब्रवीहि मे॥
अनुवाद
मार्कण्डेय ने पूछा, "नारद जी! मैंने निम्न जातियों के हवन और दान की स्थिति के बारे में सुना है। अब आप मुझे पुत्र-पुत्री तथा उनके मिलन के विषय में कुछ बताइए।"
Markandeya asked- Narada ji! I have heard about the condition of the oblations and offerings made by the lower castes. Now tell me a few things about sons and daughters and their union.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥