श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 23: मार्कण्डेयजीके द्वारा विविध प्रश्न और नारदजीके द्वारा उनका उत्तर  »  श्लोक d27
 
 
श्लोक  13.23.d27 
मार्कण्डेय उवाच
श्रुतं वर्णावरैर्दत्तं हव्यं कव्यं च नारद।
सम्प्रयोगे च पुत्राणां कन्यानां च ब्रवीहि मे॥
 
 
अनुवाद
मार्कण्डेय ने पूछा, "नारद जी! मैंने निम्न जातियों के हवन और दान की स्थिति के बारे में सुना है। अब आप मुझे पुत्र-पुत्री तथा उनके मिलन के विषय में कुछ बताइए।"
 
Markandeya asked- Narada ji! I have heard about the condition of the oblations and offerings made by the lower castes. Now tell me a few things about sons and daughters and their union.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)