Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.23.d19: नारद बोले, 'हव्य और कव्य कभी नष्ट नहीं होते, क्योंकि वे सदैव वैदिक मंत्रों द्वारा शुद्ध किए जाते हैं। यदि दानकर्ता न्यायपूर्वक इनका दान करता है, तो देवता और पितर इन्हें आदरपूर्वक स्वीकार करते हैं।' | mahabharat अध्याय 13.23: मार्कण्डेयजीके द्वारा विविध प्रश्न और नारदजीके द्वारा उनका उत्तर । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नारद उवाच
मन्त्रपूतं सदा हव्यं कव्यं चैव न नश्यति।
प्रतिगृह्णन्ति तद् देवा दातुर्न्यायात् प्रयच्छत:॥
अनुवाद
नारद बोले, 'हव्य और कव्य कभी नष्ट नहीं होते, क्योंकि वे सदैव वैदिक मंत्रों द्वारा शुद्ध किए जाते हैं। यदि दानकर्ता न्यायपूर्वक इनका दान करता है, तो देवता और पितर इन्हें आदरपूर्वक स्वीकार करते हैं।'
Narada said, 'Havya and Kavya are never destroyed because they are always purified by the Vedic mantras. If the donor donates them justly, then the gods and ancestors accept them with respect.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥