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mahabharat 13.23.d18: मार्कण्डेय ने पूछा, "जब संसार में धर्म का लोप हो जाता है और अधर्म का बोलबाला हो जाता है, तब चारों वर्णों के लिए निर्धारित हव्य और कव्य का नाश क्यों नहीं होता?"   |   mahabharat अध्याय 13.23: मार्कण्डेयजीके द्वारा विविध प्रश्न और नारदजीके द्वारा उनका उत्तर   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.23.d18 
मार्कण्डेय उवाच
एवं विलुलिते धर्मे लोके चाधर्मसंयुते।
किं चतुर्वर्णनियतं हव्यं कव्यं न नश्यति॥
 
 
अनुवाद
मार्कण्डेय ने पूछा, "जब संसार में धर्म का लोप हो जाता है और अधर्म का बोलबाला हो जाता है, तब चारों वर्णों के लिए निर्धारित हव्य और कव्य का नाश क्यों नहीं होता?"
 
Mārkaṇḍeya asked, "When Dharma vanishes and Adharma prevails in the world, then why do the Havyā and Kavya meant for the four Varnas not get destroyed?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)