श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 23: मार्कण्डेयजीके द्वारा विविध प्रश्न और नारदजीके द्वारा उनका उत्तर  »  श्लोक d16-d17
 
 
श्लोक  13.23.d16-d17 
चतुर्थं नन्दिकं नाम धर्म: पादावशेषित:॥
तत: प्रभृति जायन्ते क्षीणप्रज्ञायुषो नरा:।
क्षीणप्राणधना लोके धर्माचारबहिष्कृता:॥
 
 
अनुवाद
चौथे युग का नाम नंदिक है। उस समय धर्म का केवल एक अंश ही शेष रहता है। तब से मंद बुद्धि और अल्पायु वाले लोग जन्म लेने लगते हैं। संसार में उनकी जीवन शक्ति बहुत कम हो जाती है। वे दरिद्र हो जाते हैं और धर्म तथा सदाचार से विमुख हो जाते हैं।
 
The name of the fourth Yuga is Nandik. At that time only one part of Dharma remains. From then onwards, people with dull intellect and short lifespan start being born. Their life force in the world becomes very less. They become poor and are excluded from Dharma and good conduct.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)