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mahabharat 13.23.d10: नारदजी बोले - तप से प्रकाशित मार्कण्डेयजी की जय हो! आप स्वयं वेद-वेदांगों का सार जानने वाले हैं, फिर भी ब्रह्म हैं! जिस विषय में आपके लिए संदेह उत्पन्न हुआ है, उसे प्रस्तुत कीजिए।   |   mahabharat अध्याय 13.23: मार्कण्डेयजीके द्वारा विविध प्रश्न और नारदजीके द्वारा उनका उत्तर   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.23.d10 
नारद उवाच
दीर्घायो तपसा दीप्त वेदवेदाङ्गतत्त्ववित्।
यत्र ते संशयो ब्रह्मन् समुत्पन्न: स उच्यताम्॥
 
 
अनुवाद
नारदजी बोले - तप से प्रकाशित मार्कण्डेयजी की जय हो! आप स्वयं वेद-वेदांगों का सार जानने वाले हैं, फिर भी ब्रह्म हैं! जिस विषय में आपके लिए संदेह उत्पन्न हुआ है, उसे प्रस्तुत कीजिए।
 
Naradji said – Long live Markandeyaji, who is illuminated by penance! You yourself are the one who knows the essence of Vedas and Vedangas, yet Brahman! Present the topic where doubt has arisen for you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)