Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.23.d1: युधिष्ठिर ने पूछा, "हे मनुष्यों के स्वामी! महाराज! पुत्र प्राप्ति से मनुष्य का उद्धार कैसे होता है? पुत्र प्राप्ति के बिना मनुष्य का जीवन व्यर्थ क्यों माना जाता है?" | mahabharat अध्याय 13.23: मार्कण्डेयजीके द्वारा विविध प्रश्न और नारदजीके द्वारा उनका उत्तर । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
(युधिष्ठिर उवाच
पुत्रै: कथं महाराज पुरुषस्तरितो भवेत्।
यावन्न लब्धवान् पुत्रमफल: पुरुषो नृप॥
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा, "हे मनुष्यों के स्वामी! महाराज! पुत्र प्राप्ति से मनुष्य का उद्धार कैसे होता है? पुत्र प्राप्ति के बिना मनुष्य का जीवन व्यर्थ क्यों माना जाता है?"
Yudhishthira asked- O Lord of men! Maharaj! How is a man saved by having sons? Why is a man's life considered fruitless until he has a son?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥