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mahabharat 13.22.8: हे ब्राह्मण! अब तुम सकुशल घर लौटोगे और तुम्हें मार्ग में किसी प्रकार का कष्ट या कठिनाई नहीं होगी। तुम्हें इच्छित कन्या की प्राप्ति होगी और वह तुम्हारे द्वारा पुत्र को भी जन्म देगी। 8.   |   mahabharat अध्याय 13.22: अष्टावक्र और उत्तरदिशाका संवाद, अष्टावक्रका अपने घर लौटकर वदान्य ऋषिकी कन्याके साथ विवाह करना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.22.8 
क्षेमैर्गमिष्यसि गृहं श्रमश्च न भविष्यति।
कन्यां प्राप्स्यसि तां विप्र पुत्रिणी च भविष्यति॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे ब्राह्मण! अब तुम सकुशल घर लौटोगे और तुम्हें मार्ग में किसी प्रकार का कष्ट या कठिनाई नहीं होगी। तुम्हें इच्छित कन्या की प्राप्ति होगी और वह तुम्हारे द्वारा पुत्र को भी जन्म देगी। 8.
 
O Brahmin! Now you will return home safely and you will not have to face any trouble or difficulty on the way. You will get the desired girl and she will also give birth to a son through you. 8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)