Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.22.4: हे भोले ब्राह्मण! मैंने तो केवल तुम्हारी परीक्षा लेने और तुम्हें बल प्रदान करने के लिए ऐसा किया है। हे सत्यनिष्ठ और पराक्रमी ब्राह्मण! तुमने अपने धर्म से विचलित न होकर समस्त पुण्य लोकों को जीत लिया है॥4॥ | mahabharat अध्याय 13.22: अष्टावक्र और उत्तरदिशाका संवाद, अष्टावक्रका अपने घर लौटकर वदान्य ऋषिकी कन्याके साथ विवाह करना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जिज्ञासेयं प्रयुक्ता मे स्थिरीकर्तुं तवानघ।
अव्युत्थानेन ते लोका जिता: सत्यपराक्रम॥ ४॥
अनुवाद
हे भोले ब्राह्मण! मैंने तो केवल तुम्हारी परीक्षा लेने और तुम्हें बल प्रदान करने के लिए ऐसा किया है। हे सत्यनिष्ठ और पराक्रमी ब्राह्मण! तुमने अपने धर्म से विचलित न होकर समस्त पुण्य लोकों को जीत लिया है॥4॥
Innocent Brahmin! I have done this only to test you in order to strengthen you. Truthful and valiant Brahmin! By not deviating from your Dharma, you have conquered all the virtuous worlds.॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥