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mahabharat 13.22.3: स्त्री बोली, "हे श्रेष्ठ ब्राह्मण! स्वर्ग हो या मृत्युलोक, जहाँ भी स्त्री-पुरुष रहते हैं, वहाँ उनकी एक-दूसरे से मिलन की इच्छा सदैव बनी रहती है। हे वीर ब्राह्मण! मैं तुम्हें रूप बदलने की इस लीला का कारण बता रही हूँ। ध्यानपूर्वक सुनो।"   |   mahabharat अध्याय 13.22: अष्टावक्र और उत्तरदिशाका संवाद, अष्टावक्रका अपने घर लौटकर वदान्य ऋषिकी कन्याके साथ विवाह करना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.22.3 
स्त्र्युवाच
द्यावापृथिव्योर्यत्रैषा काम्या ब्राह्मणसत्तम।
शृणुष्वावहित: सर्वं यदिदं सत्यविक्रम॥ ३॥
 
 
अनुवाद
स्त्री बोली, "हे श्रेष्ठ ब्राह्मण! स्वर्ग हो या मृत्युलोक, जहाँ भी स्त्री-पुरुष रहते हैं, वहाँ उनकी एक-दूसरे से मिलन की इच्छा सदैव बनी रहती है। हे वीर ब्राह्मण! मैं तुम्हें रूप बदलने की इस लीला का कारण बता रही हूँ। ध्यानपूर्वक सुनो।"
 
The woman said, "O great Brahmin! Whether it is heaven or the mortal world, wherever men and women live, they always have this desire to unite with each other. O brave Brahmin! I am telling you the reason behind this play of changing the form. Listen carefully.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)