श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 22: अष्टावक्र और उत्तरदिशाका संवाद, अष्टावक्रका अपने घर लौटकर वदान्य ऋषिकी कन्याके साथ विवाह करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  13.22.18 
भीष्म उवाच
अष्टावक्रस्तथेत्युक्त्वा प्रतिगृह्य च तां प्रभो।
कन्यां परमधर्मात्मा प्रीतिमांश्चाभवत् तदा॥ १८॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं - हे प्रभु ! तत्पश्चात् परम धर्मात्मा अष्टावक्र ने 'तथास्तु' कहकर उस कन्या से विवाह कर लिया। इससे वे अत्यन्त प्रसन्न हुए ॥18॥
 
Bhishmaji says – Lord! Thereafter, saying 'Tathaastu', the supremely virtuous Ashtavakra married the girl. This made him very happy. 18॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd