Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.22.15-16: महर्षि! आपकी अनुमति लेकर मैं उत्तर दिशा में गंधमादन पर्वत की ओर चल पड़ा। उत्तर की ओर आगे बढ़ने पर मुझे एक महान देवी के दर्शन हुए। उन्होंने मेरी परीक्षा ली और मुझे आपसे भी परिचित कराया। प्रभु! फिर उन्होंने मुझे अपनी कथा सुनाई और उनकी अनुमति लेकर मैं अपने घर वापस आ गया। | mahabharat अध्याय 13.22: अष्टावक्र और उत्तरदिशाका संवाद, अष्टावक्रका अपने घर लौटकर वदान्य ऋषिकी कन्याके साथ विवाह करना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
महर्षि! आपकी अनुमति लेकर मैं उत्तर दिशा में गंधमादन पर्वत की ओर चल पड़ा। उत्तर की ओर आगे बढ़ने पर मुझे एक महान देवी के दर्शन हुए। उन्होंने मेरी परीक्षा ली और मुझे आपसे भी परिचित कराया। प्रभु! फिर उन्होंने मुझे अपनी कथा सुनाई और उनकी अनुमति लेकर मैं अपने घर वापस आ गया।
‘Maharshi! After taking your permission I started walking in the north direction towards Gandhamadan mountain. After going further north I saw a great goddess. She tested me and introduced me to you as well. Prabhu! Then she told me her story and after taking her permission I came back to my home.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥