vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 13: अनुशासन पर्व
»
अध्याय 22: अष्टावक्र और उत्तरदिशाका संवाद, अष्टावक्रका अपने घर लौटकर वदान्य ऋषिकी कन्याके साथ विवाह करना
»
श्लोक 14
श्लोक
13.22.14
पृष्टश्च तेन विप्रेण दृष्टं त्वेतन्निदर्शनम्।
प्राह विप्रं तदा विप्र: सुप्रीतेनान्तरात्मना॥ १४॥
अनुवाद
जब ब्राह्मण ने उससे उसकी यात्रा के विषय में पूछा, तब वह प्रसन्नतापूर्वक वहाँ जो कुछ देखा था, सब बताने लगा-॥14॥
When the Brahmin asked him about his journey, he happily began to tell him everything he had seen there -॥ 14॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd