श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 22: अष्टावक्र और उत्तरदिशाका संवाद, अष्टावक्रका अपने घर लौटकर वदान्य ऋषिकी कन्याके साथ विवाह करना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  13.22.12 
भीष्म उवाच
श्रुत्वा तु वचनं तस्या: स विप्र: प्राञ्जलि: स्थित:।
अनुज्ञातस्तया चापि स्वगृहं पुनराव्रजत्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं - भारत! उस स्त्री की बात सुनकर महाबली ब्राह्मण अष्टावक्र हाथ जोड़कर उसके सामने खड़े हो गए। फिर उसकी अनुमति लेकर वे अपने घर लौट गए॥12॥
 
Bhishmaji says - Bharat! After listening to that woman, the great Brahmin Ashtavakra stood in front of her with folded hands. Then after taking her permission, he returned to his home.॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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