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mahabharat 13.21.6-7: तत्पश्चात् ऋषि बड़े आश्चर्य से उठ बैठे। उन्होंने देखा कि सूर्य पूर्व दिशा में उदय हो गया है। वे सोचने लगे, "क्या यह मेरा भ्रम है या सचमुच सूर्य उदय हो गया है?" 6-7.   |   mahabharat अध्याय 13.21: अष्टावक्र और उत्तर दिशाका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 21: अष्टावक्र और उत्तर दिशाका संवाद  »  श्लोक 6-7
 
 
श्लोक  13.21.6-7 
तत उत्थाय स मुनिस्तदा परमविस्मित:॥ ६॥
पूर्वस्यां दिशि सूर्यं च सोऽपश्यदुदितं दिवि।
तस्य बुद्धिरियं किं नु मोहस्तत्त्वमिदं भवेत्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् ऋषि बड़े आश्चर्य से उठ बैठे। उन्होंने देखा कि सूर्य पूर्व दिशा में उदय हो गया है। वे सोचने लगे, "क्या यह मेरा भ्रम है या सचमुच सूर्य उदय हो गया है?" 6-7.
 
Thereafter the sage sat up in great surprise. He saw that the Sun had risen in the eastern sky. He started thinking, is this my illusion or has the sun really risen? 6-7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)