Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.21.25: परन्तु उसका यह परम सुन्दर रूप पहले कैसे जीर्ण-शीर्ण हो गया और अब यह कन्यारूप यहाँ कैसे प्रकट हुआ? ऐसी स्थिति में यहाँ उसका क्या उत्तर दिया जा सकता है?॥ 25॥   |   mahabharat अध्याय 13.21: अष्टावक्र और उत्तर दिशाका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 21: अष्टावक्र और उत्तर दिशाका संवाद  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  13.21.25 
किं त्वस्या: परमं रूपं जीर्णमासीत् कथं पुन:।
कन्यारूपमिहाद्यैवं किमिवात्रोत्तरं भवेत्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
परन्तु उसका यह परम सुन्दर रूप पहले कैसे जीर्ण-शीर्ण हो गया और अब यह कन्यारूप यहाँ कैसे प्रकट हुआ? ऐसी स्थिति में यहाँ उसका क्या उत्तर दिया जा सकता है?॥ 25॥
 
But how did this most beautiful form of hers become worn out earlier and how did this girlish form appear here now? In such a situation, what answer can be given for her here?॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)