श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 21: अष्टावक्र और उत्तर दिशाका संवाद  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  13.21.23 
अष्टावक्र उवाच
यथा मम तथा तुभ्यं यथा तुभ्यं तथा मम।
जिज्ञासेयमृषेस्तस्य विघ्न: सत्यं न किं भवेत्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
अष्टावक्र बोले - "जैसी मेरी दशा है, वैसी ही तुम्हारी भी है, और जैसी तुम्हारी दशा है, वैसी ही मेरी भी है। क्या यह सचमुच वदान्य ऋषि द्वारा ली जा रही कोई परीक्षा है या यह सचमुच कोई बाधा है?"॥23॥
 
Ashtavakra said, "As is my condition, so is yours, and as is your condition, so is mine. Is this really a test being conducted by Vadanya Rishi or is this really some obstacle?"॥23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)