श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 21: अष्टावक्र और उत्तर दिशाका संवाद  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  13.21.22 
स्त्र्युवाच
कौमारं ब्रह्मचर्यं मे कन्यैवास्मि न संशय:।
पत्नीं कुरुष्व मां विप्र श्रद्धां विजहि मा मम॥ २२॥
 
 
अनुवाद
स्त्री बोली, "हे ब्राह्मण! मैं बाल्यकाल से ही ब्रह्मचारिणी हूँ, अतः कन्या हूँ - इसमें संशय नहीं है। अब आप मुझे अपनी पत्नी बना लीजिए। मेरा धर्म नष्ट न कीजिए।"
 
The woman said, "O Brahmin! I am a brahmacharini since my childhood; hence I am a girl - there is no doubt about it. Now make me your wife. Do not destroy my faith."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)