श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 21: अष्टावक्र और उत्तर दिशाका संवाद  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  13.21.17 
स्त्र्युवाच
शिरसा प्रणमे विप्र प्रसादं कर्तुमर्हसि।
भूमौ निपतमानाया: शरणं भव मेऽनघ॥ १७॥
 
 
अनुवाद
स्त्री बोली - "अनघ! हे श्रेष्ठ ब्राह्मण! मैं आपको सिर झुकाकर प्रणाम करती हूँ और आपके सामने भूमि पर लेटी हूँ। आप मुझ पर दया करके मुझे शरण दीजिए॥17॥
 
The woman said, "Anagh! O great Brahmin! I bow my head in salutation to you and I am lying on the ground in front of you. Please have mercy on me and give me shelter.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)