vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 13: अनुशासन पर्व
»
अध्याय 21: अष्टावक्र और उत्तर दिशाका संवाद
»
श्लोक 11
श्लोक
13.21.11
पृथक्चैव तथा सुप्तौ सा स्त्री स च मुनिस्तदा।
तथार्धरात्रे सा स्त्री तु शयनं तदुपागमत्॥ ११॥
अनुवाद
उस समय वह स्त्री और ऋषि अलग-अलग सोने चले गए। जब आधी रात हुई तो वह स्त्री उठी और ऋषि के पलंग पर आकर बैठ गई।
At that time the woman and the sage went to sleep separately. When it was midnight the woman got up and came and sat on the sage's bed.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×