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mahabharat 13.20.98: तदनन्तर मुनि ने उस स्त्री को बुढ़ापे से पीड़ित देखकर अत्यन्त चिन्तित और व्याकुल हो गये ॥98॥   |   mahabharat अध्याय 13.20: अष्टावक्र मुनिका वदान्य ऋषिके कहनेसे उत्तर दिशाकी ओर प्रस्थान, मार्गमें कुबेरके द्वारा उनका स्वागत तथा स्त्रीरूपधारिणी उत्तरदिशाके साथ उनका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 20: अष्टावक्र मुनिका वदान्य ऋषिके कहनेसे उत्तर दिशाकी ओर प्रस्थान, मार्गमें कुबेरके द्वारा उनका स्वागत तथा स्त्रीरूपधारिणी उत्तरदिशाके साथ उनका संवाद  »  श्लोक 98
 
 
श्लोक  13.20.98 
अथर्षिरभिसम्प्रेक्ष्य स्त्रियं तां जरयार्दिताम्।
चिन्तां परमिकां भेजे संतप्त इव चाभवत्॥ ९८॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर मुनि ने उस स्त्री को बुढ़ापे से पीड़ित देखकर अत्यन्त चिन्तित और व्याकुल हो गये ॥98॥
 
Thereafter the sage, seeing that the woman was suffering from old age, became very worried and distressed. ॥98॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)