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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 20: अष्टावक्र मुनिका वदान्य ऋषिके कहनेसे उत्तर दिशाकी ओर प्रस्थान, मार्गमें कुबेरके द्वारा उनका स्वागत तथा स्त्रीरूपधारिणी उत्तरदिशाके साथ उनका संवाद
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श्लोक 97
श्लोक
13.20.97
ब्रह्मर्षिस्तामथोवाच स तथेति युधिष्ठिर।
वत्स्येऽहं यावदुत्साहो भवत्या नात्र संशय:॥ ९७॥
अनुवाद
युधिष्ठिर! तब ऋषि ने उनसे कहा, 'ठीक है, जब तक मेरी यहाँ रहने की इच्छा है, तब तक मैं तुम्हारे साथ रहूँगा, इसमें कोई संदेह नहीं है।'
Yudhishthira! Then the sage said to him, 'All right, as long as I have the desire to stay here, I will stay with you, there is no doubt about it.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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