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mahabharat 13.20.87-88h: काम से प्रेरित स्त्रियाँ सदैव अपनी ही इच्छा के अनुसार कार्य करती हैं। काम से उत्तेजित होने पर वे गर्म धूल पर भी चलती हैं; परन्तु उससे उनके पैर नहीं जलते।॥87 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 13.20: अष्टावक्र मुनिका वदान्य ऋषिके कहनेसे उत्तर दिशाकी ओर प्रस्थान, मार्गमें कुबेरके द्वारा उनका स्वागत तथा स्त्रीरूपधारिणी उत्तरदिशाके साथ उनका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 20: अष्टावक्र मुनिका वदान्य ऋषिके कहनेसे उत्तर दिशाकी ओर प्रस्थान, मार्गमें कुबेरके द्वारा उनका स्वागत तथा स्त्रीरूपधारिणी उत्तरदिशाके साथ उनका संवाद  »  श्लोक 87-88h
 
 
श्लोक  13.20.87-88h 
आत्मच्छन्देन वर्तन्ते नार्यो मन्मथचोदिता:॥ ८७॥
न च दह्यन्ति गच्छन्त्य: सुतप्तैरपि पांसुभि:।
 
 
अनुवाद
काम से प्रेरित स्त्रियाँ सदैव अपनी ही इच्छा के अनुसार कार्य करती हैं। काम से उत्तेजित होने पर वे गर्म धूल पर भी चलती हैं; परन्तु उससे उनके पैर नहीं जलते।॥87 1/2॥
 
‘Women inspired by lust always act according to their own desires. When they are agitated by lust they even walk on hot dust; but their feet do not burn because of it.’॥ 87 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)