Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.20.86-87h: हम यहाँ सभी दैवी और मानवीय सुखों का आनंद लेंगे। स्त्रियों को प्रिय पुरुषों की संगति से बढ़कर कोई पुण्य नहीं है। यही हमारे लिए सर्वोत्तम पुण्य है। | mahabharat अध्याय 13.20: अष्टावक्र मुनिका वदान्य ऋषिके कहनेसे उत्तर दिशाकी ओर प्रस्थान, मार्गमें कुबेरके द्वारा उनका स्वागत तथा स्त्रीरूपधारिणी उत्तरदिशाके साथ उनका संवाद । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सर्वान् कामानुपाश्नीमो ये दिव्या ये च मानुषा:।
नात: परं हि नारीणां विद्यते च कदाचन॥ ८६॥
यथा पुरुषसंसर्ग: परमेतद्धि न: फलम्।
अनुवाद
हम यहाँ सभी दैवी और मानवीय सुखों का आनंद लेंगे। स्त्रियों को प्रिय पुरुषों की संगति से बढ़कर कोई पुण्य नहीं है। यही हमारे लिए सर्वोत्तम पुण्य है।
‘We will enjoy all the divine and human pleasures here. There is no greater reward than the company of men which is dear to women. This is the best reward for us.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥