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mahabharat 13.20.74-75h: तत्पश्चात् सभी कन्याएँ ऋषि की परिक्रमा करके घर से बाहर चली गईं। केवल वह वृद्धा ही वहाँ रह गई।   |   mahabharat अध्याय 13.20: अष्टावक्र मुनिका वदान्य ऋषिके कहनेसे उत्तर दिशाकी ओर प्रस्थान, मार्गमें कुबेरके द्वारा उनका स्वागत तथा स्त्रीरूपधारिणी उत्तरदिशाके साथ उनका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 20: अष्टावक्र मुनिका वदान्य ऋषिके कहनेसे उत्तर दिशाकी ओर प्रस्थान, मार्गमें कुबेरके द्वारा उनका स्वागत तथा स्त्रीरूपधारिणी उत्तरदिशाके साथ उनका संवाद  »  श्लोक 74-75h
 
 
श्लोक  13.20.74-75h 
तत: प्रदक्षिणीकृत्य कन्यास्तास्तमृषिं तदा॥ ७४॥
निश्चक्रमुर्गृहात् तस्मात् सा वृद्धाथ व्यतिष्ठत।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् सभी कन्याएँ ऋषि की परिक्रमा करके घर से बाहर चली गईं। केवल वह वृद्धा ही वहाँ रह गई।
 
Thereafter all the girls went out of the house after circling the sage. Only that old lady remained there. 74 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)