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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 20: अष्टावक्र मुनिका वदान्य ऋषिके कहनेसे उत्तर दिशाकी ओर प्रस्थान, मार्गमें कुबेरके द्वारा उनका स्वागत तथा स्त्रीरूपधारिणी उत्तरदिशाके साथ उनका संवाद
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श्लोक 72-73h
श्लोक
13.20.72-73h
स्वस्तीति तेन चैवोक्ता सा स्त्री प्रत्यवदत् तदा॥ ७२॥
प्रत्युत्थाय च तं विप्रमास्यतामित्युवाच ह।
अनुवाद
अष्टावक्र ने 'स्वस्ति' कहकर उसे आशीर्वाद दिया। वह स्त्री उनके स्वागत के लिए पलंग से उठ खड़ी हुई और बोली - 'विप्रवर! कृपया बैठिए।'
Ashtavakra blessed her by saying 'Swasti'. The woman got up from the bed to welcome him and said - 'Vipravar! Please sit'. 72 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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