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mahabharat 13.20.7: वेदों में भी यही पढ़ा गया है कि स्त्रियाँ असत्यवादी होती हैं, ऐसी स्थिति में उनका असत्य भी सहधर्म के अंतर्गत आ सकता है, किन्तु असत्य कभी धर्म नहीं हो सकता; अतः दाम्पत्य धर्म जिसे सहधर्म कहा गया है, वह इसका गौण शब्द है। पति-पत्नी साथ रहते हुए जो कुछ भी करते हैं, उसे धर्म कहा गया है।   |   mahabharat अध्याय 13.20: अष्टावक्र मुनिका वदान्य ऋषिके कहनेसे उत्तर दिशाकी ओर प्रस्थान, मार्गमें कुबेरके द्वारा उनका स्वागत तथा स्त्रीरूपधारिणी उत्तरदिशाके साथ उनका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 20: अष्टावक्र मुनिका वदान्य ऋषिके कहनेसे उत्तर दिशाकी ओर प्रस्थान, मार्गमें कुबेरके द्वारा उनका स्वागत तथा स्त्रीरूपधारिणी उत्तरदिशाके साथ उनका संवाद  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  13.20.7 
अनृता: स्त्रिय इत्येवं वेदेष्वपि हि पठ्यते।
धर्मोऽयं पूर्विका संज्ञा उपचार: क्रियाविधि:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
वेदों में भी यही पढ़ा गया है कि स्त्रियाँ असत्यवादी होती हैं, ऐसी स्थिति में उनका असत्य भी सहधर्म के अंतर्गत आ सकता है, किन्तु असत्य कभी धर्म नहीं हो सकता; अतः दाम्पत्य धर्म जिसे सहधर्म कहा गया है, वह इसका गौण शब्द है। पति-पत्नी साथ रहते हुए जो कुछ भी करते हैं, उसे धर्म कहा गया है।
 
It has also been read in the Vedas that women are untruthful, in such a situation, their untruth can also come under co-religion, but untruth can never be Dharma; therefore, the conjugal dharma which has been called co-religion is a secondary term of it. Whatever the husband and wife do while living together, that has been termed as Dharma. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)