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mahabharat 13.20.63: उस क्षेत्र में मंदाकिनी नदी बहती थी, जिसके उद्गम पर मंदार पुष्प लहरा रहे थे। वहाँ स्वयं प्रकाशित रत्न अपनी अद्भुत शोभा बिखेर रहे थे। वहाँ की भूमि हीरों से जड़ी हुई थी। 63।   |   mahabharat अध्याय 13.20: अष्टावक्र मुनिका वदान्य ऋषिके कहनेसे उत्तर दिशाकी ओर प्रस्थान, मार्गमें कुबेरके द्वारा उनका स्वागत तथा स्त्रीरूपधारिणी उत्तरदिशाके साथ उनका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 20: अष्टावक्र मुनिका वदान्य ऋषिके कहनेसे उत्तर दिशाकी ओर प्रस्थान, मार्गमें कुबेरके द्वारा उनका स्वागत तथा स्त्रीरूपधारिणी उत्तरदिशाके साथ उनका संवाद  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  13.20.63 
मन्दारपुष्पै: संकीर्णां तथा मन्दाकिनीं नदीम्।
स्वयंप्रभाश्च मणयो वज्रैर्भूमिश्च भूषिता॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
उस क्षेत्र में मंदाकिनी नदी बहती थी, जिसके उद्गम पर मंदार पुष्प लहरा रहे थे। वहाँ स्वयं प्रकाशित रत्न अपनी अद्भुत शोभा बिखेर रहे थे। वहाँ की भूमि हीरों से जड़ी हुई थी। 63।
 
The Mandakini river flowed in that region, at whose source were flowing Mandara flowers. There the self-luminous gems were spreading their wonderful splendor. The land there was studded with diamonds. 63.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)