श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 20: अष्टावक्र मुनिका वदान्य ऋषिके कहनेसे उत्तर दिशाकी ओर प्रस्थान, मार्गमें कुबेरके द्वारा उनका स्वागत तथा स्त्रीरूपधारिणी उत्तरदिशाके साथ उनका संवाद  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  13.20.6 
अनृता: स्त्रिय इत्येवं सूत्रकारो व्यवस्यति।
यदानृता: स्त्रियस्तात सहधर्म: कुत: स्मृत:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
धर्मसूत्र के रचयिता ने निश्चयपूर्वक कहा है कि स्त्रियाँ असत्यवादी हैं। हे प्रिये! जब स्त्रियाँ असत्यवादी हैं, तो उन्हें साथ रखकर सहधर्मी का कर्तव्य कैसे निभाया जा सकता है?॥6॥
 
The author of Dharmasutra says with certainty that women are untruthful. O dear! When women are untruthful, how can one perform the duties of a co-religionist while keeping them together?॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)