Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.20.58-59: वहाँ भगवान अष्टावक्र ने एक दिव्य आश्रम देखा। उस आश्रम के चारों ओर स्वर्ण और रत्नजड़ित नाना प्रकार के पर्वत शोभायमान थे। वहाँ रत्नजड़ित भूमि पर अनेक सुन्दर बावड़ियाँ बनी हुई थीं। | mahabharat अध्याय 13.20: अष्टावक्र मुनिका वदान्य ऋषिके कहनेसे उत्तर दिशाकी ओर प्रस्थान, मार्गमें कुबेरके द्वारा उनका स्वागत तथा स्त्रीरूपधारिणी उत्तरदिशाके साथ उनका संवाद । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वहाँ भगवान अष्टावक्र ने एक दिव्य आश्रम देखा। उस आश्रम के चारों ओर स्वर्ण और रत्नजड़ित नाना प्रकार के पर्वत शोभायमान थे। वहाँ रत्नजड़ित भूमि पर अनेक सुन्दर बावड़ियाँ बनी हुई थीं।
There Lord Ashtavakra saw a divine hermitage. All around that hermitage various kinds of mountains studded with gold and gems were looking beautiful. Many beautiful step wells were built on the gem-filled land there. 58-59.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥