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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 20: अष्टावक्र मुनिका वदान्य ऋषिके कहनेसे उत्तर दिशाकी ओर प्रस्थान, मार्गमें कुबेरके द्वारा उनका स्वागत तथा स्त्रीरूपधारिणी उत्तरदिशाके साथ उनका संवाद
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श्लोक 54h
श्लोक
13.20.54h
कैलासं मन्दरं हैमं सर्वाननुचचार ह।
अनुवाद
और कैलाश, मंदराचल तथा हिमालय में सर्वत्र विचरण करने लगे । 53 1/2॥
And started roaming throughout Kailash, Mandarachal and Himalayas. 53 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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