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श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 20: अष्टावक्र मुनिका वदान्य ऋषिके कहनेसे उत्तर दिशाकी ओर प्रस्थान, मार्गमें कुबेरके द्वारा उनका स्वागत तथा स्त्रीरूपधारिणी उत्तरदिशाके साथ उनका संवाद  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  13.20.50 
अतिथि: पूजनीयस्त्वमिदं च भवतो गृहम्।
सर्वमाज्ञाप्यतामाशु परवन्तो वयं त्वयि॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
आप मेरे आदरणीय अतिथि हैं। यह घर आपका है। कृपया संकोच न करें और हमें सभी कार्यों के लिए शीघ्र आदेश दें। हम आपके अधीन आपके सेवक हैं।'
 
You are my respected guest. This house is yours. Please do not hesitate and give us orders for all the tasks quickly. We are your servants under your control.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)