Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.20.47: जब वह दिव्य नृत्य-गान प्रारम्भ हुआ, तब महातपस्वी ऋषि अष्टावक्र भी दर्शकों में बैठे और देवताओं के वर्ष से भी आगे एक वर्ष तक वे उसी प्रकार आनन्द और आनंद का आनन्द लेते रहे ॥47॥ | mahabharat अध्याय 13.20: अष्टावक्र मुनिका वदान्य ऋषिके कहनेसे उत्तर दिशाकी ओर प्रस्थान, मार्गमें कुबेरके द्वारा उनका स्वागत तथा स्त्रीरूपधारिणी उत्तरदिशाके साथ उनका संवाद । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जब वह दिव्य नृत्य-गान प्रारम्भ हुआ, तब महातपस्वी ऋषि अष्टावक्र भी दर्शकों में बैठे और देवताओं के वर्ष से भी आगे एक वर्ष तक वे उसी प्रकार आनन्द और आनंद का आनन्द लेते रहे ॥47॥
When that divine dance-song started, the great ascetic sage Ashtavakra also sat in the audience and he continued to enjoy the same fun and enjoyment for one year beyond the year of the gods. 47॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥