श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 20: अष्टावक्र मुनिका वदान्य ऋषिके कहनेसे उत्तर दिशाकी ओर प्रस्थान, मार्गमें कुबेरके द्वारा उनका स्वागत तथा स्त्रीरूपधारिणी उत्तरदिशाके साथ उनका संवाद  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  13.20.38 
सुखं प्राप्तो भवान् कच्चित् किं वा मत्तश्चिकीर्षति।
ब्रूहि सर्वं करिष्यामि यन्मां वक्ष्यसि वै द्विज॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मन्! आप यहाँ प्रसन्नतापूर्वक आए हैं न? बताइए आप मुझसे क्या कार्य करवाना चाहते हैं? आप जो भी कहेंगे, मैं उसे पूरा करूँगा।' 38.
 
‘Brahman! You have come here happily, haven't you? Tell me what task do you want me to accomplish? Whatever you tell me, I will accomplish it. 38.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)