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mahabharat 13.20.37: तत्पश्चात् विश्रवा के पुत्र कुबेर ने पास आकर निन्दनीय ऋषि अष्टावक्र से उनका कुशलक्षेम पूछा और कहा -॥37॥   |   mahabharat अध्याय 13.20: अष्टावक्र मुनिका वदान्य ऋषिके कहनेसे उत्तर दिशाकी ओर प्रस्थान, मार्गमें कुबेरके द्वारा उनका स्वागत तथा स्त्रीरूपधारिणी उत्तरदिशाके साथ उनका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 20: अष्टावक्र मुनिका वदान्य ऋषिके कहनेसे उत्तर दिशाकी ओर प्रस्थान, मार्गमें कुबेरके द्वारा उनका स्वागत तथा स्त्रीरूपधारिणी उत्तरदिशाके साथ उनका संवाद  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  13.20.37 
ततो वैश्रवणोऽभ्येत्य अष्टावक्रमनिन्दितम्।
विधिवत्कुशलं पृष्ट्वा ततो ब्रह्मर्षिमब्रवीत्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् विश्रवा के पुत्र कुबेर ने पास आकर निन्दनीय ऋषि अष्टावक्र से उनका कुशलक्षेम पूछा और कहा -॥37॥
 
Thereafter Kubera, the son of Vishrava, came near and asked the sage Ashtavakra, who was free from slander, about his well-being in a proper manner and said -॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)