श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 20: अष्टावक्र मुनिका वदान्य ऋषिके कहनेसे उत्तर दिशाकी ओर प्रस्थान, मार्गमें कुबेरके द्वारा उनका स्वागत तथा स्त्रीरूपधारिणी उत्तरदिशाके साथ उनका संवाद  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  13.20.36 
विदितो भगवानस्य कार्यमागमनस्य यत्।
पश्यैनं त्वं महाभागं ज्वलन्तमिव तेजसा॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
तुम्हारा आगमन और इस आगमन का उद्देश्य कुबेर को पहले से ही ज्ञात है। देखो, यह महान धन-रक्षक अपनी प्रभा से प्रकाशित होता हुआ आ रहा है।'॥36॥
 
‘Your arrival and the purpose of this arrival are all already known to Kubera. Look, this great treasure-keeper is coming, shining with his brilliance.'॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)