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mahabharat 13.20.33: भगवान अष्टावक्र को देखकर मणिभद्र सहित सभी राक्षस, जो उस कमलयुक्त तालाब की रखवाली कर रहे थे, उनका स्वागत करने के लिए खड़े हो गए।   |   mahabharat अध्याय 13.20: अष्टावक्र मुनिका वदान्य ऋषिके कहनेसे उत्तर दिशाकी ओर प्रस्थान, मार्गमें कुबेरके द्वारा उनका स्वागत तथा स्त्रीरूपधारिणी उत्तरदिशाके साथ उनका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.20.33 
अथ ते राक्षसा: सर्वे येऽभिरक्षन्ति पद्मिनीम्।
प्रत्युत्थिता भगवन्तं मणिभद्रपुरोगमा:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
भगवान अष्टावक्र को देखकर मणिभद्र सहित सभी राक्षस, जो उस कमलयुक्त तालाब की रखवाली कर रहे थे, उनका स्वागत करने के लिए खड़े हो गए।
 
On seeing Lord Ashtavakra, all the demons including Manibhadra, who were guarding that lotus-filled pond, stood up to welcome him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)