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mahabharat 13.20.30-31: रात्रि बीत जाने पर वे द्विज प्रातःकाल उठे, स्नान करके अग्नि प्रज्वलित की, फिर मुख्य वैदिक मन्त्रों से अग्निदेव की स्तुति करके 'रुद्राणि रुद्र' नामक तीर्थस्थान पर गए और वहाँ सरोवर के तट पर कुछ काल तक विश्राम किया। विश्राम के पश्चात् वे उठकर कैलाश की ओर चल पड़े ॥30-31॥   |   mahabharat अध्याय 13.20: अष्टावक्र मुनिका वदान्य ऋषिके कहनेसे उत्तर दिशाकी ओर प्रस्थान, मार्गमें कुबेरके द्वारा उनका स्वागत तथा स्त्रीरूपधारिणी उत्तरदिशाके साथ उनका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 20: अष्टावक्र मुनिका वदान्य ऋषिके कहनेसे उत्तर दिशाकी ओर प्रस्थान, मार्गमें कुबेरके द्वारा उनका स्वागत तथा स्त्रीरूपधारिणी उत्तरदिशाके साथ उनका संवाद  »  श्लोक 30-31
 
 
श्लोक  13.20.30-31 
ततो रात्र्यां व्यतीतायां प्रातरुत्थाय स द्विज:।
स्नात्वा प्रादुश्चकाराग्निं स्तुत्वा चैनं प्रधानत:॥ ३०॥
रुद्राणीं रुद्रमासाद्य ह्रदे तत्र समाश्वसत्।
विश्रान्तश्च समुत्थाय कैलासमभितो ययौ॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
रात्रि बीत जाने पर वे द्विज प्रातःकाल उठे, स्नान करके अग्नि प्रज्वलित की, फिर मुख्य वैदिक मन्त्रों से अग्निदेव की स्तुति करके 'रुद्राणि रुद्र' नामक तीर्थस्थान पर गए और वहाँ सरोवर के तट पर कुछ काल तक विश्राम किया। विश्राम के पश्चात् वे उठकर कैलाश की ओर चल पड़े ॥30-31॥
 
After the night passed, those Dwijas woke up in the morning, took bath and lit the fire. Then, after praising Agnidev with the main Vedic mantras, he went to the pilgrimage site named 'Rudrani Rudra' and rested there on the banks of the lake for some time. After rest, he got up and headed towards Kailash. 30-31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)