श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 20: अष्टावक्र मुनिका वदान्य ऋषिके कहनेसे उत्तर दिशाकी ओर प्रस्थान, मार्गमें कुबेरके द्वारा उनका स्वागत तथा स्त्रीरूपधारिणी उत्तरदिशाके साथ उनका संवाद  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  13.20.29 
अशोके विमले तीर्थे स्नात्वा वै तर्प्य देवता:।
तत्र वासाय शयने कौशे सुखमुवास ह॥ २९॥
 
 
अनुवाद
वहाँ शान्त अशोक तीर्थ में स्नान करके देवताओं का पूजन करके वे कुश्की चटाई पर सुखपूर्वक रहने लगे ॥29॥
 
There, after taking bath in the serene Ashoka Tirtha and offering prayers to the gods, he resided happily on a Kushki mat. 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)