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mahabharat 13.20.27-28: भीष्मजी कहते हैं - राजन ! तत्पश्चात् भगवान अष्टावक्र उत्तर दिशा की ओर चले। सिद्धों और भाटों से सेवित महान पर्वत हिमालय पर पहुँचकर वे उत्तम द्विज धर्म से सुशोभित पुण्यमयी बहुदा नदी के तट पर गए। 27-28॥   |   mahabharat अध्याय 13.20: अष्टावक्र मुनिका वदान्य ऋषिके कहनेसे उत्तर दिशाकी ओर प्रस्थान, मार्गमें कुबेरके द्वारा उनका स्वागत तथा स्त्रीरूपधारिणी उत्तरदिशाके साथ उनका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 20: अष्टावक्र मुनिका वदान्य ऋषिके कहनेसे उत्तर दिशाकी ओर प्रस्थान, मार्गमें कुबेरके द्वारा उनका स्वागत तथा स्त्रीरूपधारिणी उत्तरदिशाके साथ उनका संवाद  »  श्लोक 27-28
 
 
श्लोक  13.20.27-28 
भीष्म उवाच
ततोऽगच्छत् स भगवानुत्तरामुत्तरां दिशम्।
हिमवन्तं गिरिश्रेष्ठं सिद्धचारणसेवितम्॥ २७॥
स गत्वा द्विजशार्दूलो हिमवन्तं महागिरिम्।
अभ्यगच्छन्नदीं पुण्यां बाहुदां धर्मशालिनीम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं - राजन ! तत्पश्चात् भगवान अष्टावक्र उत्तर दिशा की ओर चले। सिद्धों और भाटों से सेवित महान पर्वत हिमालय पर पहुँचकर वे उत्तम द्विज धर्म से सुशोभित पुण्यमयी बहुदा नदी के तट पर गए। 27-28॥
 
Bhishmaji says – King! Thereafter Lord Ashtavakra moved towards the north direction. After reaching the great mountain Himalayas, served by the Siddhas and bards, he went to the banks of the virtuous Bahuda river, which was adorned with the best Dwija religion. 27-28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)