श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 20: अष्टावक्र मुनिका वदान्य ऋषिके कहनेसे उत्तर दिशाकी ओर प्रस्थान, मार्गमें कुबेरके द्वारा उनका स्वागत तथा स्त्रीरूपधारिणी उत्तरदिशाके साथ उनका संवाद  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  13.20.25 
तां दृष्ट्वा विनिवृत्तस्त्वं तत: पाणिं ग्रहीष्यसि।
यद्येष समय: सर्व: साध्यतां तत्र गम्यताम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
उसके दर्शन करके लौटने पर ही तुम मेरी पुत्री से विवाह कर सकोगे। यदि ये सब शर्तें स्वीकार हों, तो इन्हें पूरा करके अभी वहाँ की यात्रा आरम्भ करो॥ 25॥
 
Only after returning from seeing him will you be able to marry my daughter. If all these conditions are acceptable, then start fulfilling them and begin the journey there right away.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)