श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 20: अष्टावक्र मुनिका वदान्य ऋषिके कहनेसे उत्तर दिशाकी ओर प्रस्थान, मार्गमें कुबेरके द्वारा उनका स्वागत तथा स्त्रीरूपधारिणी उत्तरदिशाके साथ उनका संवाद  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  13.20.2 
आर्ष एष भवेद् धर्म: प्राजापत्योऽथवाऽऽसुर:।
यदेतत् सहधर्मेति पूर्वमुक्तं महर्षिभि:॥ २॥
 
 
अनुवाद
प्राचीनकाल में महर्षियों ने स्त्री-पुरुष के संयुक्त धर्म की बात कही है। क्या यही आर्ष धर्म है, प्रजापत्य धर्म है, अथवा आसुर धर्म है?॥2॥
 
The great sages have spoken of the joint religion of men and women in the past. Is this the Arsha Dharma or the Prajapatya Dharma or the Asura Dharma?॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)