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mahabharat 13.20.19: उस पर्वत का वह दिव्य स्थान भगवान शंकर को अत्यंत प्रिय है। ऐसा हमने सुना है। महादेवजी तथा उनके गण सदैव वहाँ निवास करते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.20: अष्टावक्र मुनिका वदान्य ऋषिके कहनेसे उत्तर दिशाकी ओर प्रस्थान, मार्गमें कुबेरके द्वारा उनका स्वागत तथा स्त्रीरूपधारिणी उत्तरदिशाके साथ उनका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 20: अष्टावक्र मुनिका वदान्य ऋषिके कहनेसे उत्तर दिशाकी ओर प्रस्थान, मार्गमें कुबेरके द्वारा उनका स्वागत तथा स्त्रीरूपधारिणी उत्तरदिशाके साथ उनका संवाद  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  13.20.19 
इष्टं किल गिरौ स्थानं तद्दिव्यमिति शुश्रुम।
नित्यं संनिहितो देवस्तथा ते पार्षदा: स्मृता:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
उस पर्वत का वह दिव्य स्थान भगवान शंकर को अत्यंत प्रिय है। ऐसा हमने सुना है। महादेवजी तथा उनके गण सदैव वहाँ निवास करते हैं।
 
That divine place of that mountain is very dear to Lord Shankar. We have heard this. Mahadevji and his associates always reside there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)