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mahabharat 13.20.18: वे झाँझ और सुन्दर ताल बजाते हुए, चम्पा ताल देते हुए, वहाँ भगवान शिव की सेवा करते हुए, उत्साहपूर्वक और समतापूर्वक नृत्य करते हैं ॥18॥   |   mahabharat अध्याय 13.20: अष्टावक्र मुनिका वदान्य ऋषिके कहनेसे उत्तर दिशाकी ओर प्रस्थान, मार्गमें कुबेरके द्वारा उनका स्वागत तथा स्त्रीरूपधारिणी उत्तरदिशाके साथ उनका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 20: अष्टावक्र मुनिका वदान्य ऋषिके कहनेसे उत्तर दिशाकी ओर प्रस्थान, मार्गमें कुबेरके द्वारा उनका स्वागत तथा स्त्रीरूपधारिणी उत्तरदिशाके साथ उनका संवाद  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  13.20.18 
पाणितालसुतालैश्च शम्पातालै: समैस्तथा।
सम्प्रहृष्टै: प्रनृत्यद्भि: शर्वस्तत्र निषेव्यते॥ १८॥
 
 
अनुवाद
वे झाँझ और सुन्दर ताल बजाते हुए, चम्पा ताल देते हुए, वहाँ भगवान शिव की सेवा करते हुए, उत्साहपूर्वक और समतापूर्वक नृत्य करते हैं ॥18॥
 
Playing cymbals and beautiful rhythms, giving the Champa rhythm, they dance vigorously and in equanimity, serving Lord Shiva there. ॥18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)