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mahabharat 13.20.15: अष्टावक्र ने पूछा - महर्षि ! उत्तर दिशा में जाते समय मुझे किससे मिलना होगा? कृपया मुझे यह बताइए और यह भी बताइए कि उस समय मुझे क्या और कैसे करना चाहिए ॥ 15॥   |   mahabharat अध्याय 13.20: अष्टावक्र मुनिका वदान्य ऋषिके कहनेसे उत्तर दिशाकी ओर प्रस्थान, मार्गमें कुबेरके द्वारा उनका स्वागत तथा स्त्रीरूपधारिणी उत्तरदिशाके साथ उनका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 20: अष्टावक्र मुनिका वदान्य ऋषिके कहनेसे उत्तर दिशाकी ओर प्रस्थान, मार्गमें कुबेरके द्वारा उनका स्वागत तथा स्त्रीरूपधारिणी उत्तरदिशाके साथ उनका संवाद  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  13.20.15 
अष्टावक्र उवाच
किं द्रष्टव्यं मया तत्र वक्तुमर्हति मे भवान्।
तथेदानीं मया कार्यं यथा वक्ष्यति मां भवान्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
अष्टावक्र ने पूछा - महर्षि ! उत्तर दिशा में जाते समय मुझे किससे मिलना होगा? कृपया मुझे यह बताइए और यह भी बताइए कि उस समय मुझे क्या और कैसे करना चाहिए ॥ 15॥
 
Ashtavakra asked - Maharshi! Whom will I have to meet when I go to the north? Please tell me this and also tell me what I should do and how at that time.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)