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mahabharat 13.2.96: भरतनन्दन! जो विद्वान प्रतिदिन इस सुदर्शन चरित्र का वर्णन करता है, वह पुण्य लोक को प्राप्त होता है॥96॥   |   mahabharat अध्याय 13.2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना  »  श्लोक 96
 
 
श्लोक  13.2.96 
इदं य: कथयेद् विद्वानहन्यहनि भारत।
सुदर्शनस्य चरितं पुण्याँल्लोकानवाप्नुयात्॥ ९६॥
 
 
अनुवाद
भरतनन्दन! जो विद्वान प्रतिदिन इस सुदर्शन चरित्र का वर्णन करता है, वह पुण्य लोक को प्राप्त होता है॥96॥
 
Bharatnandan! The scholar who narrates this character of Sudarshan every day attains the virtuous world*॥ 96॥
 
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि सुदर्शनोपाख्याने द्वितीयोऽध्याय:॥ २॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें सुदर्शनका उपाख्यानविषयक दूसरा अध्याय पूरा हुआ॥ २॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)