Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.2.91: हे नरसिंह! इसलिए तुम अपने मन में यह निश्चय कर लो कि गृहस्थ के लिए अतिथि के अतिरिक्त कोई दूसरा देवता नहीं है ॥91॥   |   mahabharat अध्याय 13.2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना  »  श्लोक 91
 
 
श्लोक  13.2.91 
तस्माद् गृहाश्रमस्थस्य नान्यद् दैवतमस्ति वै।
ऋतेऽतिथिं नरव्याघ्र मनसैतद् विचारय॥ ९१॥
 
 
अनुवाद
हे नरसिंह! इसलिए तुम अपने मन में यह निश्चय कर लो कि गृहस्थ के लिए अतिथि के अतिरिक्त कोई दूसरा देवता नहीं है ॥91॥
 
O lion of men! Therefore, you should firmly decide in your mind that for a householder there is no other god except the guest. ॥91॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)