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mahabharat 13.2.82: वह आपके गुणों से तथा पतिव्रता गुणों से सदैव सुरक्षित रहती है। उसे कोई पराजित नहीं कर सकता। वह जो कुछ भी अपने मुख से कहेगी, वह सत्य होगा। वह मिथ्या नहीं हो सकता॥ 82॥   |   mahabharat अध्याय 13.2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  13.2.82 
रक्षिता त्वद्‍गुणैरेषा पतिव्रतगुणैस्तथा।
अधृष्या यदियं ब्रूयात् तथा तन्नान्यथा भवेत्॥ ८२॥
 
 
अनुवाद
वह आपके गुणों से तथा पतिव्रता गुणों से सदैव सुरक्षित रहती है। उसे कोई पराजित नहीं कर सकता। वह जो कुछ भी अपने मुख से कहेगी, वह सत्य होगा। वह मिथ्या नहीं हो सकता॥ 82॥
 
‘She is always protected by your virtues and also by the virtues of her fidelity towards her husband. No one can defeat her. Whatever she utters from her mouth will be true. It cannot be false.॥ 82॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)